इतिहास

अवध के बहराइच में एक भर राजा मकर ध्वज थे. उसके पुत्र सुहेल देव बड़े साहसी एवं बहादुर राजा थे. बौध्द धर्म से प्रभावित यह राजा सरयू नदी पार, हिमालय की तराई, सीतापुर, गोरखपुर तक अपना राज्य स्थापित कर चुके थे. काशी पर उसी समय भर राजा बन्दार राज कर रहा था. राजा बन्दार राजा बन्दार के नाम पर एक भव्य नगर बसाया गया जिसे बन्दारस कहते थे यही बाद में बनारस कहलाया. सुहेलदेव की बन्दार से गहरी मित्रता थी. इसलिए श्रावस्ती राज्य को दक्षिण से कोई खतरा नही था.नेपाल तथा तराई के थारुओं से भी श्रावस्ती राज को खतरा नही था.

सैयद सलार मसौद गाजी, गजनी के शासक सुबुक्तगीन की बहन का पुत्र था.महमूद गजनवी सैयद सलार का मामा था. महमुद गजनवी की मृत्यु (१०३०) के उपरान्त गजनी साम्राज्य का उत्तराधिकारी मसौद गाजी घोषित किया गया. सेल्जूक तुर्कों के आक्रमण से गजनी साम्राज्य मसौद गाजी के हाथ से निकल गया, अब मसौद भागकर अपन कुछ सैनिकों सहित भारत में आ गया.वह महमूद गजनवी बनने का ख्याल देखने लगा. फतेहपुर सिकरी, एलि चपुर होता हुआ मसौद बनारस पहुँचा. उसने भर राजा बन्दार को पराजित कर अपार सम्मत्ति अर्जित की. मसौद बहराइच की तरफ बढ़ा. अब्दुर्रहमान चिस्ती के अनुसार मसौद-बन्दार युध्द राजघाट किले से लेकर बड़ी बाजार आरादक तक और बरुना नदी से लेकर बिसेसर गंज तक के मैदान पर हुआ था. इस युध्द में गाजी के पांव उखड़ गये ओर प्रस्थान कर गया.

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