सुल्तान महमूद सुबुक्तगीन का एक नौकर जिस का नाम था मौला मुहम्मद गजनवी. इस नौकर ने तवारी खई - महमूदी नामक एक पुस्तक लिखी. इसी पुस्तक के आधार पर अब्दुर्ररहमान चिस्तीने “मिरात - ई - मसौदी नामक पुस्तक की रचना की जिसमें बहराइच के राजा सुहेलदेव तथा सैयद सलार के युध्द का विस्तृत वर्णन किया गया है, सलार द्वारा राजकुमारी अंबेदेवी का अपहरण की इस घटना का तिथि क्रम ४२३ हिजरी अर्थात १०३४ ई. दिया गया है.

राजा सुहेलदेव

1 सुल्तान महमूद सुबुक्तगीन का एक नौकर जिस का नाम था मौला मुहम्मद गजनवी. इस नौकर ने तवारी खई - महमूदी नामक एक पुस्तक लिखी. इसी पुस्तक के आधार पर अब्दुर्ररहमान चिस्तीने “मिरात - ई - मसौदी नामक पुस्तक की रचना की जिसमें बहराइच के राजा सुहेलदेव तथा सैयद सलार के युध्द का विस्तृत वर्णन किया गया है, सलार द्वारा राजकुमारी अंबेदेवी का अपहरण की इस घटना का तिथि क्रम ४२३ हिजरी अर्थात १०३४ ई. दिया गया है. मिरात - ई - मसौदी के अतिरिक्त हयाते मसौदी,अल मसौदी एवं आइना मसौदी में भी अंबे देवी के अपहरण की घटना का वर्णन मार्मिक ढंग से किया है. जिसका सार - संकलन यहाँ दे रहा हूँ.

1 सुल्तान महमूद सुबुक्तगीन का एक नौकर जिस का नाम था मौला मुहम्मद गजनवी. इस नौकर ने तवारी खई - महमूदी नामक एक पुस्तक लिखी. इसी पुस्तक के आधार पर अब्दुर्ररहमान चिस्तीने “मिरात - ई - मसौदी नामक पुस्तक की रचना की जिसमें बहराइच के राजा सुहेलदेव तथा सैयद सलार के युध्द का विस्तृत वर्णन किया गया है, सलार द्वारा राजकुमारी अंबेदेवी का अपहरण की इस घटना का तिथि क्रम ४२३ हिजरी अर्थात १०३४ ई. दिया गया है. मिरात - ई - मसौदी के अतिरिक्त हयाते मसौदी,अल मसौदी एवं आइना मसौदी में भी अंबे देवी के अपहरण की घटना का वर्णन मार्मिक ढंग से किया है. जिसका सार - संकलन यहाँ दे रहा हूँ.